IRCTC New Ticket Rules: भारतीय रेलवे में टिकट बुकिंग प्रक्रिया पिछले कुछ वर्षों में तेजी से डिजिटल हुई है। ऑनलाइन रिजर्वेशन प्लेटफॉर्म के बढ़ते उपयोग के साथ सुविधा तो बढ़ी, लेकिन फर्जी बुकिंग, बॉट आधारित आरक्षण और वेटिंग लिस्ट से जुड़ी शिकायतें भी सामने आईं। इसी पृष्ठभूमि में रेलवे ने टिकट बुकिंग नियमों में कुछ संशोधन किए हैं, जिनका उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना और वास्तविक यात्रियों को प्राथमिकता देना बताया जा रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार हालिया दिशा-निर्देशों में एडवांस रिजर्वेशन अवधि, Tatkal प्रक्रिया, वेटिंग टिकट की मान्यता और चार्ट जारी होने के समय में बदलाव शामिल हैं। उपलब्ध दस्तावेज़ के आधार पर ये संशोधन डिजिटल सुरक्षा और सीट आवंटन प्रणाली को अधिक संतुलित बनाने की कोशिश माने जा रहे हैं। हालांकि अंतिम प्रभाव स्थिति और रूट पर निर्भर करेगा, इसलिए यात्रियों को आधिकारिक पुष्टि देखना जरूरी रहेगा।
एडवांस रिजर्वेशन अवधि में संशोधन: 120 दिन से 60 दिन
नई व्यवस्था के तहत अब यात्री यात्रा की तारीख से 60 दिन पहले तक ही अग्रिम टिकट बुक कर सकेंगे। पहले यह अवधि 120 दिन तक थी। रेलवे का तर्क है कि लंबी बुकिंग विंडो के कारण कई सीटें लंबे समय तक ब्लॉक रहती थीं, जिससे वास्तविक मांग का आकलन प्रभावित होता था और वेटिंग लिस्ट अनावश्यक रूप से बढ़ जाती थी।
उदाहरण के तौर पर समझें तो यदि कोई यात्री तीन-चार महीने पहले टिकट लेता और बाद में यात्रा रद्द करता, तो सीटें देर से उपलब्ध होती थीं। नई अवधि से सीटों का रोटेशन तेज हो सकता है। हालांकि त्योहारों या पीक सीजन में मांग अधिक रहने पर कन्फर्म टिकट की उपलब्धता फिर भी सीमित रह सकती है। स्थिति रूट और श्रेणी के अनुसार अलग-अलग रहेगी।
Tatkal बुकिंग में आधार सत्यापन और एजेंट प्रतिबंध
Tatkal टिकट बुकिंग को लेकर सबसे अधिक शिकायतें सामने आती रही हैं। जारी दिशा-निर्देश बताते हैं कि अब Tatkal के लिए आधार आधारित सत्यापन और OTP प्रक्रिया को अनिवार्य किया गया है। इसका उद्देश्य फर्जी पहचान या ऑटोमेटेड सॉफ्टवेयर के जरिए होने वाली बुकिंग पर नियंत्रण करना है।
इसके अलावा बुकिंग शुरू होने के पहले 30 मिनट तक अधिकृत एजेंट टिकट नहीं बुक कर सकेंगे। रेलवे से जुड़े एक पूर्व अधिकारी के अनुसार, “डिजिटल सत्यापन से सिस्टम पर दबाव कम होगा और वास्तविक उपयोगकर्ताओं को शुरुआती समय में अवसर मिल सकता है।” हालांकि यह भी स्पष्ट है कि इंटरनेट स्पीड और सर्वर लोड जैसे कारक अब भी परिणाम को प्रभावित कर सकते हैं।
वेटिंग टिकट के साथ यात्रा पर स्पष्टता
नए नियमों के अनुसार वेटिंग टिकट वाले यात्रियों को आरक्षित स्लीपर या एसी कोच में यात्रा की अनुमति नहीं होगी। यदि कोई यात्री वेटिंग स्टेटस के साथ रिजर्व कोच में पाया जाता है, तो नियमों के अनुसार कार्रवाई संभव है। पहले कई यात्रियों में इस विषय पर भ्रम रहता था कि ऑनलाइन वेटिंग टिकट मान्य है या नहीं।
अब स्पष्ट किया गया है कि केवल कन्फर्म या आरएसी टिकट ही आरक्षित डिब्बों में मान्य होंगे। उदाहरण के तौर पर यदि किसी यात्री का टिकट चार्ट बनने के बाद भी वेटिंग में रहता है, तो उसे वैकल्पिक व्यवस्था तलाशनी पड़ सकती है। यह नियम कन्फर्म टिकट धारकों की सुविधा और सुरक्षा के लिए लागू बताया गया है।
रिजर्वेशन चार्ट का समय पहले से तय
चार्ट जारी होने का समय भी बदला गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार अब ट्रेन के प्रस्थान से लगभग आठ घंटे पहले रिजर्वेशन चार्ट तैयार किया जाएगा। इससे यात्रियों को सीट की स्थिति समय रहते पता चल सकेगी और वे अपनी योजना में बदलाव कर पाएंगे।
पहले कई बार अंतिम समय में चार्ट अपडेट होने से यात्रियों को असमंजस की स्थिति का सामना करना पड़ता था। नई समय-सीमा से पारदर्शिता बढ़ने की संभावना है, हालांकि तकनीकी कारणों या विशेष परिस्थितियों में समय में अंतर हो सकता है। इसलिए यात्रा से पहले आधिकारिक प्लेटफॉर्म पर स्टेटस जांचना जरूरी रहेगा।
किराया संरचना और लोअर बर्थ प्राथमिकता
कुछ लंबी दूरी की ट्रेनों में प्रति किलोमीटर मामूली किराया संशोधन की सूचना भी सामने आई है। रेलवे का कहना है कि यह समायोजन परिचालन लागत और रखरखाव सुधार से जुड़ा है। हालांकि यह वृद्धि सभी ट्रेनों पर समान रूप से लागू नहीं है और श्रेणी के अनुसार भिन्न हो सकती है।
वरिष्ठ नागरिकों और जरूरतमंद यात्रियों के लिए लोअर बर्थ प्राथमिकता को भी अधिक सख्ती से लागू करने की बात कही गई है। उदाहरण के तौर पर यदि बुकिंग के समय आयु दर्ज की जाती है, तो सिस्टम उपलब्धता के आधार पर लोअर बर्थ आवंटित कर सकता है। फिर भी सीट आवंटन पूर्ण रूप से मांग और उपलब्धता पर निर्भर करेगा।
डिजिटल सुरक्षा और सत्यापन की नई दिशा
ऑनलाइन बुकिंग मुख्य रूप से Indian Railway Catering and Tourism Corporation (IRCTC) के माध्यम से की जाती है। रिपोर्ट के अनुसार हालिया बदलावों में लॉगिन सुरक्षा, पहचान सत्यापन और संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी पर विशेष ध्यान दिया गया है। यह कदम डिजिटल टिकटिंग को अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में उठाया गया माना जा रहा है।
यात्रियों के लिए सुझाव है कि वे केवल आधिकारिक वेबसाइट या मान्य मोबाइल ऐप का उपयोग करें। किसी भी बदलाव की पुष्टि के लिए भारतीय रेलवे की आधिकारिक सूचना देखना आवश्यक है। उपलब्ध दस्तावेज़ के आधार पर ये नियम पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से लागू किए गए हैं, लेकिन अंतिम अनुभव नेटवर्क, मांग और व्यक्तिगत परिस्थिति पर निर्भर करेगा।
Disclaimer: यह लेख सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। टिकट बुकिंग नियम, किराया और प्रक्रियाएं समय-समय पर बदल सकती हैं। यात्रा से पहले आधिकारिक वेबसाइट या संबंधित प्राधिकरण से नवीनतम दिशा-निर्देश अवश्य जांच लें।


